सामान्यतः पीएसएलवी के संक्षिप्त नाम से विख्यात ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान इसरो का प्रथम प्रचालनात्मक प्रमोचन यान है। पीएसएलवी 1600 कि.ग्रा. भार के उपग्रहों को सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा में 620 कि.मी. पर और 1050 कि.ग्रा. भार के उपग्रहों को भूतुल्यकाली अंतरण कक्षा में प्रमोचित करने में सक्षम है। मानक संरूपण में 295 टन उत्थापन भार सहित इसकी माप लंबाई में 44.4 मी. है। पीएसएलवी में बारी-बारी से ठोस और द्रव नोदन प्रणाली का उपयोग करते हुए चार चरण हैं। प्रथम चरण विश्व में सर्वाधिक बड़ा ठोस नोदन बूस्टरों में से एक है और 139 टन नोदक वहन करता है। प्रथम चरण मोटर के साथ छह स्ट्रेप-ऑन का समूह जुड़ा है, जिनमें से चार भूमि पर प्रज्वलित किए जाते हैं और दो हवा में प्रज्वलित किए जाते हैं।
पीएसएलवी की विश्वसनीयता दर उत्कृष्ट है। जुलाई, 2011 तक पीएसएलवी की 18 निरंतर सफल उड़ानें रहीं। विभिन्न संरूपणों के साथ पीएसएलवी ने एकल प्रमोचन में अपने अनेक नीतभार, बहु-मिशन क्षमता और भूतुल्यकाली प्रमोचन क्षमता सिद्ध की है। अभी हाल ही के चन्द्रयान मिशन में, पीएसएलवी के अन्य संस्करण स्ट्रैप-ऑन मोटर के विस्तारित संस्करण पीएसओएम-एक्सएल सहित, 620 कि.मी. एसएसपीओ में नीतभार परिवहन में 1750 कि.ग्रा. तक वृद्धि की गई। सही तौर पर पीएसएलवी ने इसरो के प्रमोचन यान के रूप में लंबी रेस के घोड़े की स्थिति प्राप्त की है।
पीएसएलवी के विशिष्ट प्राचल | |
उत्थापन भार | 295 टन |
नीतभार | 620 कि.मी. ध्रुवीय कक्षा में 1600 कि.ग्रा. भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में 1060 कि.ग्रा. |
ऊँचाई | 44 मीटर |
| पीएसएलवी की उपलब्धियाँ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
|
