भुवन
भुवन एक पारस्परिक बहुमुखी चित्र-कल्प प्रणाली है जो कि उपयोगकर्ता को भुवन ग्लोब में नेविगेट( या उड़ान 'fly ') करने की , उपग्रह द्वारा लिए गए प्रतिबिम्ब को देखने की, उन् प्रतिबिम्बों पर प्राकृतिक संसाधनों, सड़क, भौगोलिक विशेषता, विशिष्ट बिंदु की जानकारी आदि देखने की सुविधा देता है. उपयोगकर्ता इसमें अपने खुद के दिलचस्पी के बिंदु (पीओआई) जोड़ सकते हैं और दूसरों के साथ उसे साझा भी कर सकते हैं. वे दूरी की गणना, क्षेत्र मापन , अपने प्रतिबिम्बों का भुवन पर आच्छादन, आदि कर सकते है. इंटरनेट के साथ जुड़ते ही, आप भुवन पर विशिष्ट स्थानों से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
उपयोगकर्ता किसी भी परत को छुपा या दिखा सकता है . भुवन पर मापन एवं विभिन्न विश्लेषण उपकरणों के द्वारा उपयोगकर्ता क्षेत्र मापन, दूरी मापन आदि कर सकते हैं, और इसको त्रिआयामी भुवन में भी देख सकते हैं. वे अपने दिलचस्पी के बिंदु (पीओआई) भुवन पर बनाकर उन्हें अन्य वेबसाइट से लिंक भी कर सकते हैं जिससे वे उस स्थापना से संपर्क कर सकते हैं.
भुवन उन लोगों के लिए पसंदीदा बन गया है जो आसानी से अनेक जगहों को दिखाना चाहते हैं, जैसे एक खनन कम्पनी जोकि अपने वर्तमान या मुख्य स्थानों की प्रस्तुति दे रही हो वह भुवन का उपयोग कर सकती है. कईं शिक्षक भुवन द्वारा अपने शिष्यों को विषयों का ज्ञान प्रदान कर सकते हैं जैसे- इतिहास, भूगोल आदि. वैज्ञानिक भुवन से विषयगत जानकारियां लेते है जैसे भूमि के इस्तेमाल से सम्बंधित चित्र आदि, और उन्हें वास्तविक दुनिया से जोड़ते हैं. कुछ प्रशासकों ने जमीनी स्तर पर योजनाओं के विकास के लिए भुवन को उपयोगी पाया हैं.
भुवन के साथ वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता तथा आमा जनता बिना किसी संसाधनों के इस भूस्थानिक डाटा की विशाल मात्रा के एकीकरण का उपयोग कर सकते हैं. भुवन के उपकरण अत्यंत उपयोगी हो सकते हैं उदहारण के लिए, इसका उपयोग भोगोलिक सर्वेक्षण के लिए किया जा सकता हैं, विद्यार्थी इसका उपयोग स्थानों को जानने और उनका अध्ययन करने के लिए कर सकते हैं. यह मिलापकारी सूचनायें प्रदान करता है जो की उपयोगकर्ता को देश के ऐसे स्थानों को खोजने में मदद करते हैं जहाँ वे व्यक्तिगत रूप से नहीं जा सकते.
भुवन उपयोगकर्ता को संसाधन बनाने और उन्हें साझा करने में मदद करता है. अन्य उपयोगकर्ताओं से योगदान के साथ, दूर के स्थलों की खोज एवं ब्राउज़िंग करके भुवन उपयोगकर्ताओं को एक सम्मोहक अवसर प्रदान करता है. भुवन उपयोगकर्ताओं को योगदान भूगोल के संदर्भ में लघुकथाओं, कहानियों और इतिहास सम्बंधित संवाद करने की अनुमति देता है.
उद्देश्य
भुवन का उद्देश्य विभिन्न विषयों जैसे भूमि संसाधन, कृषि, मृदा, जल, महासागर विज्ञान, भूजल क्षमता, पारिस्थिक प्रणाली जैव विविधता आदि पर सूचना प्रदान करना है जो विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों के तहद बहु-विभेदक सुदूर संवेदक चित्रों से प्राप्त की जाती हैं। यह भू स्थानिक सेवा निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रदान की जाती है:
मृदा
देश के प्राकृतिक संसाधनों अपने निवासियों के आर्थिक विकास के लिए प्राथमिक महत्व के होते हैं, विशेषतः मृदा संसाधन जो मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भोजन, रेशा, और ईंधन की लकड़ी को उपजाने के लिए अनवीनीकरणीय महत्वपूर्ण संसाधन है।
मृदा के किसी भी कार्य में हानि उनके गुणवत्ता, महत्त्व और परितंत्र की मूलभूत आवश्यकताओं को समर्थन करने की क्षमता में कमी लाती है। इसलिए मृदा संसाधन की विस्तृत सूचनाओं जैसे प्रकार, स्थानिक वितरण, प्रसार, सीमाएँ जैसे – कटाव, लवणीयकरण, क्षारियकरण, जल जमाव आदि और सम्बंधित संभावनाओं की विभिन्न उद्देश्यों के प्रयोजन के लिए आवश्यकता है। ऐसी सूचनाएं गैर-कृषि क्षेत्रों जैसे - सड़क निर्माण, रेलवे बाँधों, इंजीनियरिंग संरचनाओं आदि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हमारे देश में मृदा संसाधनों के बारे में जानकारी का अभाव और अनुचित भूमि उपयोग की योजना के कारण वर्तमान समय में भूमि क्षरण की समस्या बढती जा रही है। समय के साथ साथ सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी में भी उन्नति हुई है और इसे प्रचलानात्मक तरीके से मृदा और भू-क्षरण के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
कृषि
अंतरिक्षवाहित सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी और उनके अनुप्रयोगों के अपूर्व विकास ने कृषि संसाधानों की विस्तृत सूची के लिए अपार संभावनाएं स्थापित की है।
राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र कृषि के क्षेत्र जैसे फसल क्षेत्रफल और उत्पादन आंकलन, कृषि सूखा मूल्यांकन, बुआई पैटर्न/प्रणाली विश्लेषण, फसल निरीक्षण, फसल के स्थिति का आकलन और बागवानी फसल सूची आदि सहित विभिन्न परियोजनाओं पर काम किया है। यह प्रमुख खाद्य फसलों के लिए फसल कटाई के पूर्व की भी सूचना प्रदान करता है।
परियोजना, राष्ट्रीय कृषि सूखा आंकलन निरीक्षण प्रणाली (NADAMS) के अंतर्गत मोटे विभेदक राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA)- उन्नत उच्चतर विभेदक विकिरणमापी द्वारा राज्य स्तर पर लिए गए डाटा और भारतीय सुदूर संवेदन वाईड फील्ड सेंसर (IRS - WiFS) & उन्नत वाईड फील्ड सेंसर (AWiFS) द्वारा राज्य और जिला स्तर पर प्राप्त डाटा का प्रयोग करते हुए कृषि की स्थिति का नित्य रूप से निरीक्षण किया जाता है।
महासागर सेवाएं
जनसंख्या में वृद्धि और तेजी से घट रहे भूमि संसाधनों ने महासागरीय संसाधनों के दोहन और शोषण की ओर अग्रसित किया है। महासागरीय संसाधनों का विवेकहीन दोहन परितंत्र मे असंतुलन पैदा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, महासागर जलवायु परिवर्तन द्वारा मानसून को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है जो हमारे आर्थिक विकास में निर्णायक है.
सूदूर संवेदन प्रद्यौगिकी प्राकृतिक महासागर संसाधनों के प्रबंधन और अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है। जहाँ संभावित मत्स्य पालन (PFZ) क्षेत्र, तेल स्लिक, खनिज भंडार और पर्यटन आदि पर अध्ययन आर्थिक महत्व रखते हैं, वहीँ तटीय क्षेत्र, सदाबहार वनस्पति क्षरण, मूंगा विरंजन आदिका अध्ययन परितंत्र को अक्षुण्ण बनाए रखने में उपयोगी हैं।
जल
बढती हुई माँग को पूरा करने के लिए जल संसाधनों के इष्टतम प्रबंधन आवश्यक है जिसके लिए उचित योजना एवं प्रबंधन जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा संकेत देता है कि कई बार उपयुक्त आंकड़ों की प्रचुर उपलब्धता उचित योजना और प्रबंधन के लिए प्रतिबंधक कारक होते हैं।
हाल ही में, जल संसाधन विकास और प्रबंधन के भू-आंकड़ों के पूरण और सम्पूरण हेतु सुदूर संवेदन और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) को प्रभावी उपकरण के रूप में स्वीकार किया गया है। अंतरिक्षवाहित सुदूर संवेदी डेटा उपलब्ध जल संसाधनों और उनके प्रयोग हेतु समयोचित और विश्वसनीय प्रदान करता है.
भारत में सुदूर संवेदन निवेश ने जल प्रबंधन के संरक्षण और नियंत्रण दोनों पहलुओं पर सार्थक योगदान दिया है। मामूली शुरुआत के बाद, सुदूर उपग्रह संवेदी प्रौद्योगिकी अब बर्फ जलविज्ञान, जलाशय अवसादन मूल्यांकन, सिंचाई जल प्रबंधन, जलविज्ञान सम्बन्धी अध्ययन, बाढ़ प्रबंधन आदि जटिल क्षेत्रों के प्रबंधन में उन्नति की है।
परितंत्र
शहरीकरण और औद्योगिकीकरण ने भारत के बुनियादी ढ़ांचे और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को बढ़ा दिया है. वनों की कटाई, मृदा क्षरण, जल प्रदूषण और भूमिक्षरण से पारितंत्र बिगड़ता जा रहा है और भारत के आर्थिक विकास में रूकावट उत्पन्न कर रहे हैं।
सुदूर संवेदन उपग्रहों द्वारा प्राप्त डाटा और भुवन से लिए गए चित्रों की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण मामलों का समाधान करना संभव हो पाया है। पारितंत्र से संबंधित मुद्दों – पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, पर्यावरण प्रबंधन योजना, पर्यावरण परीक्षण, भू-क्षेत्र एवं जीवमंडल अध्ययनों, बदलते खेती के मानचित्रण आदि.