उपग्रह प्रणाली
पिछले चार दशकों में, इसरो ने मोबाइल संचार, डायरेक्ट टू होम सेवाएँ, मौसमविज्ञानीय प्रेक्षण, दूर-चिकित्सा, दूर-शिक्षा, आपदा चेतावनी, रेडियो नेटवर्किंग, खोज और बचाव कार्य, सुदूर संवेदन और अंतरिक्ष के वैज्ञानिक अध्ययन जैसे विभिन्न वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के लिए 60 से अधिक उपग्रहों को प्रमोचित किया है।
इसरो ने दो प्रमुख अंतरिक्ष प्रणालियाँ, यथा संचार, टेलीविजन प्रसारण और मौसमविज्ञानीय सेवाओं के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (इन्सैट), जो भू-स्थिर उपग्रह है और संसाधन मॉनीटरन और प्रबंधन के लिए भारतीय सुदूर संवेदी उपग्रह (आईआरएस), जो कि भू-प्रेक्षण उपग्रह है, स्थापित किया है। इसरो ने अंतरिक्ष के अन्वेषण के लिए कई प्रायोगिक उपग्रहों को प्रमोचित किया है जो सामान्यतः इन्सैट या आईआरएस और अंतरिक्ष मिशनों की तुलना में छोटे हैं।
भारतीय राष्ट्रींय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली
भारतीय राष्ट्रींय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली, जिन्हें भू-स्थिर कक्षाओं में स्थापित किया गया है, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की व्यापक घरेलू संचार उपग्रह प्रणालियों में से एक है। 1983 में इन्सैट-1बी के प्रवर्तन के साथ स्थापित, इसने भारत के संचार क्षेत्र में प्रमुख क्रान्ति लाई और बाद में उसे बनाए रखा। इन्सैट अंतरिक्ष खंड में 24 उपग्रह हैं, जिनमें से 10 ( इन्सैट-2ई, इन्सैट-3ए, इन्सैट-3बी, इन्सैट-3सी, इन्सैट-3ई, कल्पना-1, इन्सैट-4ए, इन्सैट-4बी, इन्सैट-4सीआर, जीसैट-8) कार्यरत हैं।
प्रणाली में सी, विस्तारित सी और केयू बैंडों में लगभग 175 प्रेषानुकर दूरसंचार, टेलीविज़न प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी और खोज तथा बचाव कार्यों में सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
भारतीय सुदूर संवेदन (आईआरएस) उपग्रह प्रणाली
भारतीय सुदूर संवेदन (आईआरएस) उपग्रह प्रणाली 1988 में आईआरएस-1 ए के प्रमोचन के साथ आरंभ हुई। नौ उपग्रहों के प्रचालन के साथ, आईआरएस विश्व में वृहत्तम नागरिक सुदूर संवेदन उपग्रह समूह है जो विभिन्न प्रकार के स्थानिक, विभेदन, स्पैमकट्रमी बैण्ड़ और प्रमार्जों में प्रतिबिंबिकी उपलब्ध् करवा रहा है। यह आँकड़ा कृषि, जल संसाधन, शहरी विकास, खनिज संभावनाओं, पर्यावरण, वन, सूखा और बाढ़ अनुमान , समुद्री संसाधन और आपदा प्रबंधन को सम्मिलित करते हुए अनेक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है।
प्रायोगिक/ लघु उपग्रह
इसरो ने मुख्यतः प्रायोगिक उद्देश्य से कई छोटे उपग्रह प्रमोचित किए हैं। इस प्रयोग में शामिल हैं सुदूर संवेदन, वायुमंडलीय अध्ययन, नीतभार विकास, कक्षा नियंत्रण, पुनःप्राप्ति प्रौद्योगिकी आदि।
| प्रायोगिक/ लघु उपग्रह | विषयवस्तु | प्रमोचन दिनांक |
| यूथसैट भारत–रूस का एक संयुक्त तारकीय और वायुमण्डलीय उपग्रह मिशन है। | 20.04.2011 | |
| स्टुडसैट | सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र (एसडीएसडी , शार) से आयोजित पीएसएलवी के सत्रहवें मिशन में प्रमोचित। | 12.07.2010 |
| अनुसैट | सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र (एसडीएससी, शार) से आयोजित पीएसएलवी के पन्द्रहवें मिशन में प्रमोचित। | 20.04.2009 |
| एसआरई-1 | अन्तरिक्ष कैप्सूल पुनःप्राप्ति परीक्षण (एसआरई-1) एक 550 कि.ग्रा. भारवाला कैप्सूल है | 10.01.2007 |
| आर एस 1 | भास्कर -1 के समान दूसरा प्रयोगात्मक सुदूर संवेदन उपग्रह। निर्माण में अनुभव प्रदान किया | 18.07.1980 |
| आर टी पी | भास्कर -1 के समान दूसरा प्रयोगात्मक सुदूर संवेदन उपग्रह। निर्माण में अनुभव प्रदान किया | 10.08.1979 |
| एप्पल | पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह। निर्माण और संचालन में अनुभव प्रदान किया। | 19.06.1981 |
| आर्यभट्ट | स्वदेश में निर्मित प्रथम भारतीय उपग्रह। | 19.04.1975 |