उपग्रह नौसंचालन
गगन
नागरिक विमानन मंत्रालय ने उपग्रह-आधारित संचार, नौसंचालन और नागरिक विमानन के लिए निगरानी (सीएनएस)/हवाई यातायात प्रबंधन (एटीएम) योजना के भाग के रूप में एक स्वदेशी उपग्रह-आधारित क्षेत्रीय जीपीएस संवर्धन प्रणाली के कार्यान्वयन का निर्णय लिया है, जो अंतरिक्ष-आधारित संवर्धन प्रणाली (एसबीएएस) के रूप में भी जाना जाता है। भारतीय एसबीएएस प्रणाली को गगनपरिवर्णी शब्द दिया गया है - यानी जीपीएसतथाजीईओसंवर्धित नौसंचालन। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और इसरो द्वारा संकल्पना के प्रमाण स्वरूप भारतीय वायुक्षेत्र पर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन प्रणाली (टीडीएस) के कार्यान्वयन सहित उपग्रह नौसंचालन के लिए संयुक्त रूप से राष्ट्रीय योजना तैयार की गई है। 2007 के दौरान आठ भारतीय हवाई अड्डों पर भारतीय रेफ़रेन्स स्टेशन (आईएनआरईएस) के संस्थापन और बेंगलूर के समीप अवस्थित मास्टर कंट्रोल सेंटर (एमसीसी) से उसके संयोजन द्वारा टीडीएस सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
पीसैट (प्राथमिक प्रणाली स्वीकृति जाँच ) का संचालन गगन में अगली प्रमुख उपलब्धि रही, जिसे दिसम्बर 2010 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया । जीसैट-8 द्वारा भेजे जानेवाले प्रथम नौवहन नीतभार को 2011, की द्वितीय तिमाही के दौरान प्रमोचित करने का लक्ष्य है। 2012 की प्रथम तिमाही के दौरान, जीसैट-10 द्वारा दूसरे नीतभार के प्रमोचन की योजना है । एक अन्य जीयो उपगह द्वारा तीसरे गगन नीतभार की योजना बनाई गई है।