Tuesday, September 27, 2011

एडुसैट कार्यक्रम




एडुसैट कार्यक्रम 

भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान (जीएसएलवी-एफ़01) द्वारा सितंबर 2004 में प्रमोचित एडुसैट, केवल शैक्षणिक सेवाओं के लिए समर्पित भारत का पहला विषयपरक उपग्रह है। उपग्रह को विशेष रूप से अन्योन्य-क्रिया वाली कक्षाओं के निर्माणार्थ, मल्टी-मीडिया बहु-केंद्रक प्रणाली के नियोजन द्वारा, दृश्य-श्रव्य माध्यमों के ज़रिए प्रसारण के लिए संरूपित किया गया है। एडुसैट में भारत के विविध भागों को आवृत करते हुए अनेक क्षेत्रीय बीम हैं - देश के उत्तर, उत्तरपूर्व, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम क्षेत्रों को आवृत करते हुए पाँच के. यू बैंड प्रेषानुकर, भारतीय मुख्यभूमि क्षेत्र को अपने पदचिह्न से आवृत करते हुए एक के. यू बैंड प्रेषानुकर और पूरे देश को अपने पदचिह्न से आवृत करते हुए छह सी-बैंड प्रेषानुकर। एडुसैट को तीन चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है, प्रायोगिक, अर्ध-प्रचालन और प्रचालन चरण। जबकि प्रायोगिक चरण जारी रहा है, अर्ध-प्रचालन और प्रचालन चरण को वर्ष के दौरान कार्यान्वित किया गया। 

एडुसैट पहले से ही एकतरफ़ा टी.वी.प्रसारण, अन्योन्य-क्रिया टी.वी., वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, कंप्यूटर कॉन्फ़्रेंसिंग, वेब-आधारित अनुदेश आदि जैसे व्यापक शैक्षिक वितरण विधियाँ उपलब्ध करा रहा है। 

अब तक चौंसठ नेटवर्क स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 10 नेटवर्क राष्ट्रीय के. यू बैंड बीम का उपयोग करते हैं और 36 नेटवर्क क्षेत्रीय के. यू बैंड तथा विस्तृत-सी बैंड राष्ट्रीय बीमों पर सक्रिय हैं। कुल लगभग 34699 कक्षाओं सहित 3386 अन्योन्य-क्रिया कक्षाएँ और 31313 केवल अभिग्राही कक्षाएँ मौजूद हैं। सभी द्वीपों (अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप), उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू व कश्मीर सहित लगभग पूरे देश को आवृत करते हुए 24 राज्यों में पहले ही नेटवर्क स्थापित किए जा चुके हैं। बाक़ी राज्यों में कार्यान्वयन प्रगति पर है। 

विशेष नेटवर्क 

एडुसैट पर नवोन्मेषी नेटवर्कों में एक है "दृष्टिहीनों के स्कूलों" के लिए नेटवर्क। ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन, अहमदाबाद दृष्टिहीन लोगों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, रोज़गार और पुनर्वास को बढ़ावा देने वाला एक अग्रणी संगठन है। दृष्टिहीनों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर विचार करते हुए, सक्रिय ऑडियो और आँकड़ा वितरित करने वाला एक बिल्कुल अलग तरह का प्रसारण नेटवर्क विन्यास स्थापित किया गया, जिसे दृष्टिहीन मुद्रित चिह्न (ब्रेल) के माध्यम से पढ़ते हैं। 

इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों पर आठ-सप्ताह के पाठ्यक्रम को चलाने के लिए अमेरिका के शीर्ष 21 विश्वविद्यालयों से भारत आने वाले विशिष्ठ प्रोफ़ेसर/संकाय द्वारा पाठ पढ़ाने हेतु पूरे देश में 50 इंजीनियरिंग संस्थानों को जोड़ते हुए विस्तृत सी-बैंड में एक और विशेष नेटवर्क स्थापित किया गया है। यह नेटवर्क अब अतिरिक्त 30 अंतिम प्रयोक्ताओं सहित आईआईटी-मुंबई के नेटवर्क से साझा किया गया है। 

इसके अतिरिक्त, आईआईएम, बेंगलूर के लिए चेन्नै में उसके अन्य केंद्र के साथ संयोजित नेटवर्क; विद्यार्थियों और सामान्य जनता के बीच वैज्ञानिक मनोवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के सभी पाँच केंद्रों को जोड़ता हुआ एक विस्तृत सी-बैंड नेटवर्क; महाभारत संस्थान के लिए परिरक्षणार्थ केंद्रीकृत पुरालेख केंद्र को मोबाइल टर्मीनल के माध्यम से सुदूर क्षेत्रों के ज़रिए डिजिटाइज़ की गई पांडुलिपियों के ऑनलाइन संचरण के लिए नेटवर्क; केरल में मानसिक रूप से विकलांग बच्चों के माता-पिता और उनके विद्यालयों के अध्यापकों को शिक्षित करने और जागरूकता पैदा करने के लिए दो नेटवर्क; नेत्र-अनुरक्षण प्रदान करने के लिए अरविंद वर्चुअल अकादमी के केंद्रों को तमिलनाडु और पांडिचेरी में जोड़ता नेटवर्क; आदि कुछ विशिष्ट नेटवर्क हैं, जिन्हें एडुसैट उपयोगिता कार्यक्रम के अधीन स्थापित/कार्यान्वित किया गया है। 

शैक्षणिक टी.वी. सेवाएँ 

इन्सैट का उपयोग तमिल, मराठी, उड़िया, तेलुगू और हिन्दी में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चो के लिए शैक्षणिक टी.वी. (ईटीवी) उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है। राष्ट्रीय नेटवर्क पर एक उच्च शिक्षा (महाविद्यालयीन क्षेत्र) पर सामान्य संवर्धन कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है। ये कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा, अपने देश भर में कक्षा कार्यक्रम के भाग के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (आईजीएनओयू) विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय नेटवर्क के ज़रिए प्रति दिन आधे घंटे का पाठ्यक्रम आधारित व्याख्यान प्रसारित करता है। 


प्रशिक्षण और विकासात्मक संचार चैनल (टीडीसीसी) 

प्रशिक्षण, विकास और संचार चैनल (टीडीसीसी) के लिए - कुल 8 विस्तृत सी-बैंड चैनल - इन्सैट-3बी पर 6 और एडुसैट पर 2 - का उपयोग किया जा रहा है, जो सेवा 1995 से प्रचालन में है। यह अन्योन्य-क्रिया शिक्षा की एक-तरफ़ा वीडियो और दो-तरफ़ा ऑडियो प्रणाली उपलब्ध कराती है। पाठ पढ़ाने के छोर पर एक स्टूडियो और लाइव या पहले से रिकॉर्ड किए गए व्याख्यानों को प्रसारित करने के लिए एक अपलिंक सुविधा शामिल है। देश भर में स्थित कक्षाओं में सहभागी सामान्य डिश एंटेना (डीआरएस) के माध्यम से व्याख्यान प्राप्त करते हैं टेलीफ़ोन लाइनों का उपयोग करते हुए प्राध्यापकों के साथ परस्पर-क्रिया करने की उनके पास सुविधा उपलब्ध है। 

कई राज्य सरकारें और विश्वविद्यालयों द्वारा सुदूर शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला और बाल विकास, पंचायती राज, स्वास्थ्य, कृषि, वानिकी आदि के लिए टीडीसीसी प्रणाली का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। शिक्षण-छोर अब गुजरात, मध्यप्रदेश, उड़िसा, कर्नाटक और गोआ में उपलब्ध हैं। डीआरएस नेटवर्क में देश भर में 5000 से ज़्यादा कक्षाएँ फैली हुई हैं।