दूर-चिकित्सा कार्यक्रम, देश के सुदूर, दूरवर्ती और अल्प-सेवा पाने वाले क्षेत्रों के साथ स्वास्थ्य-देखरेख सेवाओं के लिए बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और मेडिकल साइन्स सहित उपग्रह संचार प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रोद्योगिकी के लाभों के तालमेल की एक नवोन्मेषी प्रक्रिया है।
भारत की एक अरब से अधिक आबादी के लिए स्वास्थ्य-देखरेख उपलब्ध कराना, जिसमें लगभग 75 प्रतिशत ग्रामों में बसे हों, एक अत्यंत कठिन कार्य है। लगभग 75 प्रतिशत डॉक्टर शहरों में और 23 प्रतिशत अर्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यवसाय चलाते हैं। इससे केवल 2 प्रतिशत योग्यता प्राप्त डॉक्टर बचते हैं, जो ग्रामों में बसी 70 प्रतिशत आबादी की देखभाल के लिए, लगभग 23,000 प्राथमिक स्वास्थ्य और 3000 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े हैं।
इसरो द्वारा वर्ष 2001 में दूर-चिकित्सा प्रायोगिक परियोजना की शुरूआत, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन संकल्पना के प्रमाण के अंश के रूप में आधारिक स्तर की आबादी को दूर-चिकित्सा सुविधा प्रवर्तित करने के उद्देश्य से की गई। दूर-चिकित्सा सुविधा ज़रूरतमंद और अल्प-सेवा पाने वाली आबादी को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के लिए इन्सैट उपग्रहों के माध्यम से सुदूर जिलों के अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्रों को शहरों के सुपर स्पेशैलिटी अस्पतालों से जोड़ती है।
इसरो में दूर-चिकित्सा पहल मोटे तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों में विभाजित की गई है:
- दूर-चिकित्सा प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराना तथा दूर-परामर्श, उपचार एवं डॉक्टरों व पराचिकित्सकों के प्रशिक्षणार्थ सुदूर/ग्रामीण अस्पतालों और सुपर स्पेशैलिटी अस्पतालों के बीच संबंध स्थापित करना।
- मेडिकल कॉलेजों और स्नातकोत्तर मेडिकल संस्थानों/अस्पतालों के बीच चिकित्सकीय शिक्षा (सीएमई) जारी रखने के लिए प्रौद्योगिकी और संयोजकता उपलब्ध कराना।
- विशेष रूप से नेत्रविज्ञान और सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्रों में ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों के लिए मोबाइल दूर-चिकित्सा एककों हेतु प्रौद्योगिकी और संयोजकता उपलब्ध कराना।
- आपदा प्रबंधन सहाय और राहत के लिए प्रौद्योगिकी और संयोजकता उपलब्ध कराना।
सम्प्रति, इसरो के दूर-चिकित्सा नेटवर्क ने 382 अस्पतालों में दूर-चिकित्सा सुविधा सक्षम किया है। 306 सुदूर/ग्रामीण/जिला अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्र और 16 मोबाइल दूर-चिकित्सा एकक प्रमुख शहरों में अवस्थित 51 सुपर स्पेशैलिटी अस्पतालों से जुड़े हैं। दूर-नेत्रिकी, मधुमेह जाँच, मैमोग्राफ़ी, बच्चों की देखभाल और सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए मोबाइल वाहनों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। मोबाइल दूर-नेत्रिकी सुविधाएँ ग्राम स्तर पर नेत्र शिविरों, मोतियाबिंद/सबलवायु/मधुमेह दृष्टिपटल विकृति सहित नेत्रों की देखभाल में ग्रामीण जनता को सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं।
दूर-चिकित्सा सुविधाएँ जम्मू और कश्मीर, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, उत्तर-पूर्वी राज्य आदि सहित देश के कई राज्यों और संघशासित प्रदेशों के कई सुदूर ग्रामीण जिलों के अस्पतालों में स्थापित की गई हैं। कर्नाटक, केरल, राजस्थान, महाराष्ट्र, उड़िसा और छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय दूर-चिकित्सा नेटवर्क स्थापित किए गए हैं। उड़िसा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और गुजरात के कई अभ्यंतर जिलों में दूर-चिकित्सा सुविधा मौजूद है। प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख मरीज़ दूर-चिकित्सा का लाभ पा रहे हैं।