Tuesday, September 20, 2011

इसरो के आगामी उपग्रह : 2011

रिसैट-1
राडार प्रतिबिंबन उपग्रह (रिसैट)संश्लेषी द्वारक राडार(एसएआर) वहन करने वाला एक सूक्ष्म तरंग सुदूर संवेदक उपग्रह है। 1850 कि.ग्रा भार वाला उपग्रह विकास के अंतिम चरणों में है जिसे 536 कि.मी. कक्षा में 25 दिनों की आवृत्ति और स्थूल विभेदन स्कैनसार विधा के लिए 12 दिन आंतरिक चक्र के अतिरिक्त लाभ सहित, अगले वर्ष प्रमोचित किया जाएगा।
मेघा-ट्रॉपिक्स
इसरो और फ़्रेंच राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (सीएनईएस) ने मेघा-ट्रॉपिक्स (मेघा का संस्कृत में अर्थ है मेघ और ट्रॉपिक्स का फ़्रेंच में अर्थ है उष्णकटिबंधी) के विकास और क्रियान्वयन के लिए, 2004-05 में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। 2011 के दौरान मेघा-ट्रॉपिक्स के प्रमोचन की योजना है।


मेघा-ट्रॉपिक्स का उद्देश्य संवहनी प्रणालियों के जीवन चक्र और उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों के वायुमंडल में संबद्ध ऊर्जा और आर्द्रता राशि में उनकी भूमिका को समझना है। उपग्रह प्रतिबिंबन रेडियोमीटर सूक्ष्मतरंग विश्लेषण तथा वर्षा और तथा वायुमंडलीय संरचनाओं का संसूचन (एमएडीआरएएस), छह चैनल वाला आर्द्रता परिज्ञापक (एसएपीएचआईआर), चार चैनल का विकिरण बजट मापन स्कैनर (एससीएआरएबी) और जीपीएस रेडियो आच्छादन प्रणाली (जीपीएस-आरओएस) वहन करेगा। 
इन्सैट-3डी
इन्सैट-3डी जिसका चैनल प्रतिबिंबित्र आँकडा रिले प्रेषानुकार तथा उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव नीतभार सहित 19 चैनल प्रतिबिंबित्र जैसे उन्नत मौसमविज्ञानीय नीतभारों के साथ संरूपित एक विशिष्ट मौसमविज्ञानीय उपग्रह है, 2090 किलोग्राम उत्थापन द्रव्यमान सहित लगभग 1100 वाट की ऊर्जा क्षमता के साथ 1-2 के. मानक द्वारा अन्तरिक्षयान मंच को अपनाया गया है ।
सरल
एग्रोस तथा आल्टिका (सरल) के लिए उपग्रह इसरो सीएनईएस का संयुक्त मिशन है तथा लगभग 800 कि.मी. की तुंगता पर 6 बजे सायं के स्थानीय समय पर आरोही नोड पर 2011-12 के दौरान पीएसएलवी-सी20 द्वारा सूर्य-तुल्यकाली कक्षा में प्रमोचित किया जाएगा ।
एस्ट्रोसैट
एस्ट्रोसैट एक राष्ट्रीय बहुतरंगदैर्घ्य अन्तरिक्ष वाहित खगोलीय वेधशाला है, जिसके द्वारा खगोल पिंडो, एक्स-किरण तथा पराबैंगनी स्पेक्ट्रमी बैण्डों में ब्रम्हांडीय स्रोतों का एक साथ प्रेक्षण किया जा सकेगा । एस्ट्रोसैट की अद्वितीयता उसके विस्तृत स्पेक्ट्रमी कवरेज में है जो दृश्य (3500-6000Å), पैराबैंगनी (1300-3000Å) मृदु और कठोर एक्स किरण क्षेत्रों पर फैली हैं । सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र, श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी द्वारा 650 कि.मी. की तुंगता में 80 कक्षीय आनति पर उपग्रह को प्रमोचित किया जाएगा ।
जीसैट-6
जीसैट-6 अन्तरिक्षयान को भारतीय मुख्य भूमि के आवरण हेतु 5 एस.बैण्ड किरणपुंज के साथ समर्पित किया गया है । प्रत्येक किरणपुंज एक सी X एस बैण्ड अग्रेषित कड़ी प्रेषानुकर तथा एस X सी बैण्ड वापसी कडी प्रेषानुकर की सहायता करता है । इस प्रकार 5 किरणपुंज में, 5 जोडी प्रेषानुकर होते है, संचार कडी एक हब के द्वारा प्रचालित होती है । अन्तरिक्षयान में मानक 1-2के. को लगाया जाता है । जिसमें लगभग 3.1 किलोवॉट की विद्युत उत्पन्न करने की क्षमता होती है । उत्थापन के समय अन्तरिक्षयान का भार 2200 कि.ग्रा. होता है । नीतभार उच्च शक्ति वाले एस.बैण्ड टीडब्ल्यूटीए तथा एक 6मी. की खुलने वाली ऐन्टेना के नए प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता है ।
जीसैट-7
जीसैट-7 एक बहु बैण्ड उपग्रह है तो यूएचएफ, एस.बैण्ड, सी.बैण्ड तथा के.यू बैण्ड पर नीतभार का वहन करता है । जीएसएलवी पर 2011 के दौरान इसके प्रमोचन की योजना है । उपग्रह का भार 2000 वाट के नीतभार ऊर्जा सहित 2330 कि.ग्रा. है । उपग्रह के संरूपण को अंतिम रूप दिया गया है तथा नए नीतभार तत्वों के डिजाइन को पूरा किया जा चुका है ।
जीसैट-9
जीसैट-9 भारत प्रसार क्षेत्र किरणपुंज सहित 12 के.यू. बैण्ड प्रेषानुकरों तथा एक गगन नीतभार का वहन करेगा । जीएसएलवी द्वारा 2013-14 के दौरान, उपग्रह के प्रमोचन की योजना है । मंच प्रणाली, 2330 कि.ग्रा. के उत्थापन द्रव्यमान तथा 2300 वाट के नीतभार शक्ति सहित 1-2के. उपग्रह पर आधारित है ।
जीसैट-10
जीसैट-10 अन्तरिक्षयान, 12 के.यू.बैण्ड, 12 सी बैण्ड तथा 12 विस्तारित सी बैण्ड प्रेषानुकरों तथा गगन (जीपीएस संवर्धित नौवहन) नीतभार का वहन करने वाले के.यू. तथा सी. बैण्ड प्रेषानुकरों की बढती हुई आवश्यकताओं को संवर्धित करता है । अन्तरिक्षयान में 3400 कि.ग्रा. के उत्थापन द्रव्यमान सहित लगभग 6 किलोवाट की विद्युत क्षमता वाले मानक 1-3केज्ञ संरचना का प्रयोग करता है । 2012 के दौरान प्रमोचन के लिए अन्तरिक्षयान के प्रापण हेतु उप-प्रणाली संविरचना तथा परीक्षण प्रगति पर है ।
जीसैट-11
जीसैट-11, 1-4के. बस पर आधारित है । जो विकास के उन्नत चरण पर है । अन्तरिक्ष्यान 10-12 किलोवाट के विद्युत के उत्पन्न कर सकता है तथा 8 किलोवाट के नीतभार ऊर्जा की सहायता कर सकता है । नीतभार का संरूपण चल रहा है । इसमें अंडमान व निकोबार द्वीप सहित समूचे देश को आवरित करता हुआ 16 स्थलीय किरणपुंज शामिल हैं । प्रयोक्ता अंत टर्मिनल में संचार कडी के.यू.-बैण्ड में प्रचालित होता है जबकि हब के लिए संचार कडी के.ए.बैण्ड में प्रचालित होती है । नीतभार को, उच्च आँकडा संपूर्ण उपग्रह के रूप प्रचालन हेतु संरूपित किया गया है । जिसे 2013 के समय ढाँचे में कक्षा में मुक्त किया जाएगा ।
जीसैट-14
जीसैट-14 का उद्देश्य एडुसैट की प्रतिस्थापना करना है क्योंकि भारत आवरित किरणपुंज को प्रदान करता हुआ 6 के.यू. तथा 6 विस्तारित सी बैण्ड प्रेषानुकरों सहित इस अन्तरिक्षयान को संरूपित किया गया है । इसके अलावा, अन्तरिक्षयान के.ए.बैण्ड बीकन का भी वहन करता है जिसका भारतीय क्षेत्र में के.ए.बैण्ड उपग्रह संचार कडी पर वर्षा तथा वायुमंडलीय प्रभाव से संबंधी अध्ययन के लिए इसके प्रयोग की योजना है । अन्तरिक्षयान का भार लगभग 2050 कि.ग्रा. तथा स्वदेशी क्रायोजनिक ऊपरी चरण सहित जीएसएलवी द्वारा इसके प्रमोचन की योजना है ।
आईआरएनएसएस-1
भारतीय क्षेत्रीय नौवहनीय उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) -1, आईआरएनएसएस तारामंडल के सात उपग्रहों का पहला उपग्रह है । जो नौवहन नीतभार तथा सी.बैण्ड रेंज वाले प्रेषानुकर का वहन करता है । अन्तरिक्षयान 1380 कि.ग्रा. के उत्थापन द्रव्यमान तथा लगभग 1600 वाट के विद्युत व्यवस्था करने की क्षमता सहित अनुकूलतम 1-1के. संरचना का प्रयोग करता है तथा इसे 7 वर्ष के नामीय मिशन कालावधि के लिए डिजाइन किया गया है । 2012-13 के दौरान, आईआरएनएसएस तारामंडल के प्रथम उपग्रह का प्रमोचन की योजना है जबकि 2014 के समय ढाँचे के दौरान पीएसएलवी द्वारा संपूर्ण तारामण्डल को मुक्त करने की योजना है ।