Tuesday, September 27, 2011

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली


भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली 



1983 में अभिचालित इन्सैट श्रृंखला, आज एशिया, प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी देशीय उपग्रह प्रणालियों में से एक बन गई है जिसमें 9 उपग्रह सेवारत हैं।

1.
21 मई, 2011 को प्रमोचित
2.
02 सितंबर, 2007 को प्रमोचित
3.
12 मार्च, 2007 को प्रमोचित
4.
22 दिसंबर, 2005 को प्रमोचित
5.
28 सितंबर, 2003 को प्रमोचित
6.
10 अप्रैल, 2003 को प्रमोचित
7.
12 सितंबर, 2002 को प्रमोचित
8.
24 जनवरी, 2002 को प्रमोचित
9.
3 अप्रैल, 1999 को प्रमोचित



इन्सैट प्रणाली अंतरिक्ष विभाग, दूरसंचार विभाग, भारत मौसम विभाग, आकाशवाणी और दूरदर्शन का संयुक्त उद्यम है। 1983 में स्थापित,ग्यारह उपग्रह के प्रचालन सहित इन्सैट प्रणाली, एशिया प्रशांत क्षेत्र का बृहत् घरेलू संचार उपग्रह प्रणालियों में से एक है। ये उपग्रह, मौसम संबंधी उपकरणों के अलावा, सी, विस्तृत सी तथा के.यू. बैण्ड में 200 से अधिक उपग्रहों का वहन करता है। 

दूर-शिक्षा, दूरस्थ-चिकित्सा तथा आपदा प्रबंधन प्रणाली (डीएमएस) की सहायता सहित विविध सामाजिक उपयोगों के लिए, इन्सैट का उपयोग किया जाता है। ग्रामीण संसाधन केन्द्र (वीआरसी) को प्राकृतिक संपदा, भू और जल संसाधन प्रबंधन, दूर-चिकिस्ता, दूर-शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य-सुरक्षा और परिवार कल्याण कार्यक्रमों के लिए जानकारी उपलब्ध कराने हेतु इन्सैट तथा आईआरएस उपग्रहों द्वारा प्रस्तुत सेवाएँ प्रदान करने वाले एकल पटल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। इन्सैट से मौसम संबंधी आँकड़े का उपयोग मौसम के पूर्वानुमान के लिए किया जाता है और चक्रवात जैसे आसन्न आपदा के प्रति चेतावनी के सीधे संचरण के लिए, असुरक्षित तटवर्ती क्षेत्रों में विशिष्ट रूप से डिज़ाइन किए गए आपदा पूर्व-सूचना अभिग्राही संस्थापित किए गए हैं। 


इन्सैट प्रणाली के प्रमुख अनुप्रयोग हैं:
  • एडुसैट कार्यक्रम 
  • दूरचिकित्सा 
  • टेलीविज़न 
  • उपग्रह समाचार संग्रहण और प्रसार 
  • रेडियो नेटवर्क 
  • दूरसंचार 
  • मोबाइल उपग्रह सेवाएँ 
  • मौसम 
  • उपग्रह आधारित खोज और बचाव 
  • उपग्रह नौवहन 
  • आपदा प्रबंधन सहायता 
  • ग्रामीण संसाधन केन्द्र