Tuesday, September 20, 2011

इसरो : भविष्य के अंतरिक्ष विज्ञान मिशन


अंतरिक्ष विज्ञान मिशन

अन्तरिक्ष कैप्सूल पुर्नप्राप्ति प्रयोग (एसआरई-II)
एसआरई II का मुख्य उद्देश्य, पूर्णतः पुर्नप्राप्ति कैप्सूल को प्राप्त करना सूक्ष्मजैविकी, कृषि, चूरन धात्विक, इत्यादि के प्रयोग हेतु मंच उपलब्ध कराना, 2011-12 के दौरान पीएसएलवी द्वारा एसआरई-2 का प्रमोचन प्रस्तावित है।

चंद्रयान-2

चन्द्रयान-2 चन्द्रमा की ओर भारत के दूसरे मिशन, में कक्षित्र तथा रोवर के लिए इसरो मुख्यरूप से उत्तरदायी होगा ; रोस्कॉमोस लैंडर के लिए उत्तरदायी होगा, चन्द्रयान-2 का, लगभग 2012-13 के समय ढाँचे के दौरान, भारत के भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (जीएसएलवीमार्कIII) के द्वारा प्रमोचित किया जाएगा। मिशन का वैज्ञानिक उद्देश्य कक्षित्र पर स्थित यंत्रावलियों को उपयोग करते हुए चन्द्रमा के मूल तथा विकास के बारे में जानकारी के बढ़ाने तथा लैंडर एवं रोवर का प्रयोग करते हुए चन्द्र नमूने का स्वस्थाने विश्लेषण करना है।
कक्षित्र के लिए निम्नांकित पाँच नीतभारों को चुना गया हैः 
  1. चन्द्र सतह पर उपस्थित मुख्य अवयवों के मानचित्रण के लिए बृहद् क्षेत्र वाले मृदु एक्स-किरण स्पेक्ट्रममापी तथा सौर एक्स-किरण मानीटरन (एक्सएसएम)।
  2. हिमजल सहित विभिन्न घटक की उपस्थिति के लिए चन्द्र सतह पहले कुछ दस मीटर के अन्वेषण के लिए एल व एस बैण्ड संश्लेषी द्वारक राडार (एसएआर) चन्द्रके अंधकार वाले क्षेत्र के नीचे हिमजल की उपस्थित की पुष्टि करते हुए एसआरई द्वारा आगे के प्रमाण उपलब्ध कराने की अपेक्षा है।
  3. खनिजों, जलकणों तथा उपस्थित हाईड्रॉक्सिल के अध्ययन के लिए बृहद् तरंगदैर्ध्य पर चन्द्र सतह के मानचित्रण के लिए आई आर स्पेक्ट्रममापी प्रतिबिंबिन (आईआईआरएस)
  4. चन्द्र बर्हिमंडल के विस्तृत अध्ययन के लिए निरावेशी द्रवयमान स्पेक्ट्रममापी (चेस-2)
  5. चन्द्र खनिज विज्ञान तथा भूविज्ञान के अध्ययन के लिए आवश्यक त्रिविमीय मानचित्र को तैयार करने के लिए भू मानचित्रण कैमरा (टीएमसी-2.)
भारतीय रोवर के लिए चुने गये निम्नांकित दो वैज्ञानिक नीतभार लैडिंग साइट के निकट चन्द्र सतह का तात्विक विश्लेषण करेंगे। 
  1. लेजर प्रेरित ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (एलआईबीएस)
  2. अल्फा कण प्रेरित एक्स-किरण स्पेक्ट्रोस्कोप (एपीआईएक्सए)
चंद्रयान-2 अभियान में एक कक्षीयान/अवतरण/भ्रमण विन्यास की योजना है। मिशन 2012-13 में साकार होने की अपेक्षा है। अभियान का वैज्ञानिक लक्ष्य कक्षीयान पर मौजूद उपकरणों का उपयोग करते हुए चंद्रमा की व्युत्पत्ति और विकास के बारे में हमारी समझ में और सुधार करना तथा रोबोट/रोवरों का उपयोग करते हुए चंद्रमा के आवरण प्रस्तर गुणों का अध्ययन (सुदूर और प्रत्यक्ष विश्लेषण) करना है।

आदित्य-1
प्रथम भारतीय अंतरिक्ष आधारित दृश्य और समीपवर्ती आईआर बैंडों में सौर प्रभामंडल के अध्ययन के लिए प्रथम भारतीय अंतरिक्ष आधारित सौर प्रभामंडललेखी है। आदित्य अभियान का प्रमोचन अगले उच्च सौर गतिविधि अवधि 2012 - 2013 के दौरान संपन्न करने की योजना है। प्रमुख उद्देश्य प्रभामंडलीय द्रव्यमान उत्क्षेपण (सीएमई) और फलस्वरूप अंतरिक्ष वायुमंडल के लिए प्रभामंडीय चुंबकीय क्षेत्र संरचनाएँ, प्रभामंडलीय चुंबकीय क्षेत्र की क्रमागत उन्नति आदि जैसे महत्वपूर्ण भौतिक प्राचल का अध्ययन है। यह प्रभामंडल की न सुलझाई गई ताप की समस्या पर असर डालने वाले, वेग क्षेत्रों पर पूर्णतः नई जानकारी और उनकी आंतरिक प्रभामंडल पर परिवर्तन शीलता उपलब्ध कराएगी।